Skip to content

Dil ki Baat · Nov 11, 2024 · 0:42:18

Is PRESIDENT TRUMP releasing IMRAN KHAN?!? | Dil ki Baat 033 | Muzamil Hasan

In today’s episode of Dil Ki Baat, we’re diving into the potential impact of Donald Trump’s return to power on the global stage and, most.

1 min read

Full transcript
Muzamil

सामने ख़बत दिनों, इस रात channel पर वापस आने का बहुत बहुत शुक्रिया. आप सब ने देखा होगा कि America के presidential elections ख़त्म हो चुके हैं और Donald Trump साहब फिर से America के president बनने जा रहे हैं. अब जाहिर है इसके ऊपर Pakistan में भी बड़ी गया साराइयां हो रही हैं कि Donald Trump के president बनने के बाद आख़िर Pakistan की सियासत पूरी बदल जाएगी और दुनिया में क्या आप तबाही होने जा रही है या happily ever after होने जा रहा है? आइए इन तमाम सवालों का जवाब देते हैं इस video में. अच्छा अब video start करने से पहले मैं आपको honestly बता देता हूं अगर आप कि आने वाले वक़्त में होगा क्या? और चूंकि यह एक detailed analysis होगा तो I do apologize यह video थोड़ी सी लंबी होगी और थोड़ी सी unstructured होगी. लेकिन please bear with me. I promise you कि आपको बड़ा कुछ सीखने को भी मिलेगा और आपका दिमाग़ बेवकूफ बनाना वह आपको एक negative twist बेचेंगे. लेकिन मैंने जाकर जब populist की definition निकाली तो Oxford dictionary में कुछ ऐसे लिखी हुई है. A person, especially a politician, who strives to appeal to ordinary people who feel that their concerns are disregarded by established elite groups. यानी कि अगर आपके महाश्रे के अंदर कुछ elite groups ने एक ऐसा system बनाया हुआ है जो कि सिर्फ़ उन्हीं को enrich करी जा रहा है और जो population at large है वह परेशान हो रही है और अनोय हो रही है और अब उनसे तंग आ चुकी है. Western media से और western media ने इस populist को एक negative term क्यों दिया? क्योंकि western media के अंदर उनके elite के interest थे और जैसा कि मैं आपको आगे बताऊंगा, Donald Trump एक America के अंदर power struggle को represent करते हैं. एक ऐसी power struggle जो कि existing system और existing status को और एक alternate system जो कि पूरा निज़ाम हिलाकर रख देगी उसके दरमियान हैं. देखिए जब हम पाकिस्तानी America को देखते हैं ना तो हम उसको एक single entity consider करते हैं कि यार America ने यह कर दिया, America ने वह कर दिया, America जो है presidential elections हो गई हैं. America यह चाहता है, America वह चाहता है. इस colonial mindset से बाहर निकलो, अपने अंदर देखो, उनको देखना छोड़ दो. भाई आपकी बात बिल्कुल बजाय है लेकिन fact of the matter is कि America is the world's largest economy. 20 percent of global GDP is in America. यानी कि पूरी दुनिया जो effort डालकर जो productivity बनाती है उसमें से 1 4th America में लगती है. पाकिस्तानियों के लिए America सबसे बड़ी export destination है जहां सालाना हम पांच अरब dollar से ज़्यादा का माल फ़रोक्त करते हैं. यानी कि America की economy directly Pakistan की economy को impact करती है. But इससे भी ज़्यादा important बात यह है कि America as of right now दुनिया की वाहिद super power है और एक ऐसी super power जो कि बहुत heavily involved है पूरी दुनिया की geopolitics के अंदर यह क्या तुम capitalism की different एक साम ले आए हो? हौसला रखिए मैं आपको explain कर देता हूं exactly क्या चीज़ें हैं. देखिए capitalism एक wider falsify है जैसा कि communism है, socialism है लेकिन within capitalism उसकी different branches हैं, different implementations हैं और जो दो सबसे powerful implementations हैं वह हैं finance capitalism और industrial capitalism जो कि हमने history में implement होते हुए भी देखी हैं और हमने उनके results भी देखे हैं. तो सबसे पहले discuss करते हैं कि finance capitalism क्या होता है? Finance capitalism एक ऐसा economic system है जहां पर financial markets और institutions एक economy को चलाते हैं. आपका पैसा किधर लगेगा और आपकी जो economic power है वह कहां से drive होगी? इसका फ़ैसला financial sector करता है ना कि industrial या production sectors. इस system में माल को manufacture या उसको ख़रीदो फ़रोक्त करने के बजाए ज़्यादा focus यह होता है कि आप क़र्ज़ा देकर, investments करके, stock trading करके, real estate में investment करके इससे पैसा किस तरह बना सकते हैं और चूंकि आपका जो financial निज़ाम है वह disconnected होता है आपकी main industry से, main जो manufacturing है. वह सारा numbers पर होता है कि यार जितना real estate है Pakistan में भी हमने देखा कि यार fileओं पर fileएं चल रही हैं, और जहां पर उनके richest billionaires जो हैं वह सौ अरब, डेढ़ सौ अरब, दो सौ अरब को cross कर रहे हैं. वहां पर उनकी general population जो है उनके लिए अब गुज़ारा भी मुश्किल होता जा रहा है. लेकिन इस सबके अंदर Wall Street जो कि America का growth engine समझा जाता है उसके वारे ने आ रहे हैं. वह बेहतरीन चल रहा है. दो हज़ार आठ में उनकी speculation ने पूरी market crash की. पूरे America के अंदर लोगों के हालात ख़राब हुए. इतने लोगों ने suicide की. लोगों की savings दबा हो गई. लेकिन banks जो कि उस time के ऊपर collapse होने चाहिए थे. वजह से finance capitalism के खिलाफ industrial capitalism मैदान में आया. अच्छा अब यह industrial capitalism क्या है? देखिए industrial capitalism o g capitalism है जो कि अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी की industrial revolution से शुरू हुआ था. यह वह form of capitalism है जिसने Europe को ताकि मैं उसको eventually बेचूं और उसके बस ज़्यादा से ज़्यादा चीज़ें लूं. Industrial capitalism का primary focus economy of scale और mass production होता है और वह total अपनी मेहनत इस चीज़ पर लगाते हैं कि मैं किस तरीके से अपने पूरी manufacturing फिर उसके साथ किसी भी एक successful civilization को अगर grow करना है तो उसके लिए कुछ requirements होती हैं जैसा कि energy, food, water. America के पास यह तमाम चीज़ें indigenously available हैं. जैसा कि for example Ottoman empire, वह ज़्यादातर Europe के अंदर है और उस Europe के अंदर finance capitalism ना सिर्फ़ emerge करता है बल्कि बहुत successful हो जाता है. अच्छा, अब इस time के ऊपर America इतना disconnected होता था पूरी दुनिया से कि जब 1st World War हुई तो American president ने actually जाकर सोलह सफाई के अंदर help किया और एक पूरी organization तश्कील देने में मदद की जिसका नाम था League of Nations जो कि eventually UN बनकर आपके सामने आज नज़र आती है आपको. लेकिन जब League of Nations बनी 19 21 के अंदर capitalist relocate करना शुरू हो गया London से New York और उसने अपना financial center बनाया New York के अंदर जिसको आप आजकल के जमाने में Wall Street से भी जानते हैं और यहां पर फिर हम देखते हैं कि America अब एक बड़े different flow में emerge करता हुआ हमें नज़र आता है. ना सिर्फ़ वह UN बनाता है, उसके अंदर एक primary role भी अपनाता है, but उसके साथ ही IMF बनाता है, World Bank बनाता है जो कि financial institutions हैं to create an economic system that is driven by the financial system और साथ ही एक Britain Woods agreement होती है जिसमें यह कहा जाता है कि आइंदा से जो दुनिया की reserve currency होगी वह America का dollar होगा. अब यह जो changes थी इसकी वजह से America एक बहुत ही powerful state के तौर पर पूरी दुनिया में emerge करता है. जाहिर है अब उनका dollar reserve currency है. दुनिया के किसी भी मुल्क ने अगर trade करनी है, कुछ भी करना है तो foreign currency सबसे पहले वह US dollar ख़रीदेगा. जिसका मतलब यह हुआ कि America के printed dollars अब पूरी दुनिया में चल सकते हैं. Financial systems या economic systems की जंग में वह sustain कर सके और वह all powerful होकर emerge करे. तो इसी वजह से उन्होंने communism के साथ बहुत ज़्यादा लड़ाइयां की और ensure किया कि USSR 19 91 में तबाह हो और उसके साथ साथ तमाम जो communist countries हैं वह अपने communist way of life, communist economic system को छोड़ें और America का finance capitalist led system embrace करें. अब यह तो हम सबको पता है. आप कह रहे होंगे कि यार इसमें कोई नई बात तो नहीं है. जो चीज़ काफ़ी लोग miss कर रहे हैं वह यह है कि America से हटकर अपनी कोई gold currency बनाएंगे और America ने आगे उसको फुड़का दिया. यह again कोई conspiracy की बातें नहीं हैं. यह तमाम written हैं, यह तमाम declassified हैं, किस तरीके से America पिछले पचास साठ साल के अंदर regime changes करता रहा है, उनके dollar को मानेगी. तो America जो है वह अपनी अयाशी बरकरार रख सकता है, उसका बंदा अमीर रह सकता है and so on and so forth. लेकिन आज के यहां हालात बड़े फ़र्क़ हैं. America के ऊपर 35000000000000 dollars का debt है. America की economy इतना तेज़ी से grow नहीं कर पा रही जिस तरह से comparably अगर India की economy को देखें या China की economy को देखें और सबसे interesting बात कि America continuously पिछले तीस सालों से import बहुत कुछ कर रहा है और export बहुत कम कर रहा है. यानी कि वह consume बहुत ज़्यादा करते हैं आपको पता यह लगता है कि जहां पर Soviet Union का 19 91 में collapse हुआ था, वहीं पर China ने World Trade Organization join की, जिसको join करने से China ने industrial capitalism को अपनाया. अब जब American Chinese को लेकर आए तो American ने सोचा कि यार ठीक है, हमें But अगर मैं summary में आपको बता सकूं तो basically China ने किया यह कि अब उन्होंने कहा कि यार जो मेरे extra dollars हैं ना वह मैं America को वापस नहीं दूंगा. मैं अपनी investments को diversify करना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि कल को मेरा जो consumer है उसने रोड़े बनाना शुरू कर दी. उसने basically development करना शुरू कर दी पूरी दुनिया के अंदर ताकि दुनिया की जो यह नई आबादी, जो youth population आ रही है यह consumer बने कल की बनने वाली Chinese goods के लिए. अब यहां पर America को problem start हुई जो मैंने आपको बताया. पहला दो हज़ार आठ का financial crisis जिसकी वजह से finance capitalism को एक झटका लगा और लोगों की resentment बढ़ी उनकी तरफ़. दूसरा जो deep state America की थी उन्होंने देखा और यह realize किया कि अगर तो जो पैसा जो हम बहुत आराम से हर साल लोगों से वापस लेते रहते हैं अगर वह पैसा वापस आना बंद हो गया और अगर उस पैसे को लोग left right invest करना शुरू हो गए तो हमारी consumption तो out हो जाएगी. देखिए America जो है वह क्यों इतना नहीं है. बहुत सारी different superpowers या major powers के साथ ऐसा हो चुका है जिनकी currencies एक जमाने में reserve currency थी और फिर eventually जब लोगों ने उसको dump करना शुरू किया तो वहां पर currency की सारी value lose हो गई और hyperinflation आ गई. America को भी यही धच्का लगा हुआ है. अभी थोड़ा सा complicated हो गया है इसमें you know financial system भी है, currency भी है. अगर ज़्यादा complicated हो गया है आप मुझे comment section में आकर बता सकते हैं. मैं detailed specifically इसके ऊपर एक video कर लूंगा कि जो currency का system है यह America ने कैसे बनाया? कैसे उसको sustain करते हैं? Russia भी उस तरह alternate financial system की बात कर रहा है. Bitcoin वाले आ रहे हैं वह कह रहे हैं यार dollar को dump करो, bitcoin पर आ जाओ. हर तरफ़ से US financial system को इस वक़्त मार पड़ रही है और इस मार के ऊपर दो school of thoughts इस वक़्त America में exist करते हैं जो कि potential solutions बता रहे हैं. पहला finance capitalist वाला जो कि हमने देखा कि Joe Biden और जो existing establishment है उनका total निज़ाम क्या है कि यार पूरी दुनिया में जंगे करो. Make sure करो किसी तरह China की rice को रोको, Russia की rice को रोको, sanction लगाओ, कि आप जलीर होकर रह जाएंगे, hyperinflation हो जाएगी, पूरा निज़ाम धर्म बर्म हो जाएगा, आपके लिए sustain करना और recover करना मुश्किल होगा. तो बेहतर यह है कि इस चीज़ को understand कर लो कि यार हमने ज़रूरत से ज़्यादा चलाने लगा ली थी. हमने over हमें पांच दस साल चाहिए जिसमें हम सिर्फ़ और सिर्फ़ आंखें बंद करके सर नीचा रखकर अपनी industrial capacity को वापस rebuild करें और हम फिर से global stage पर rise करेंगे as a great power और इसी context के अंदर फिर आपको समझ आती है Donald Trump की जब वह कहता है कि यार जंगे ख़त्म करो, NATO के पैसे हम क्यों दे रहे हैं, Europeans क्यों नहीं दे रहे हैं? South Korea से फौज को वापस बुलाओ, Germany से फौज को वापस बुलाओ, Ukraine, Russia की जंग ख़त्म करो. क्योंकि इससे पहले finance capitalist जो है उसने एक बड़ा ख़ूबसूरत सा funnel बनाया हुआ था कि यार दुनिया में एक जंग कराओ. जंग कराकर के America का पैसा बहुत सारा जो कि tax से इकट्ठा होता है उस पैसे को जिसमें जो great power competition है वह economic competition के अंदर होगा, वह business competition के अंदर होगा, वह manufacturing के अंदर होगा. आप Donald Trump, उसके vice president, उसके supporters की बातें सुनें तो वह बार बार यह कह रहे हैं कि यार हमें क्या ज़रूरत एक नया future promise कर रहे हैं. एक ऐसा future जो कि less conflicts, less geopolitics, less games, less regime changes. हां, मैं यह मानता हूं कि वह एक बड़ा aggressive किस्म का individual है, एक बड़ा eccentric किस्म का individual है. एक ऐसा individual है जो कि real है, honest है. अगर वह racist है तो वह अपनी racism दिखा देगा. वह बाकियों की तरह नहीं है जो कि जो ना मीसने तरीके से जाते हैं. वह Obama की तरह कि यार देखो peace loving yes we can. हम जो है ना चाहिए. हमें ज़्यादा से ज़्यादा optimization of business, optimization of industry की तरफ जाना चाहिए जहां पर ज़्यादा jobs के मवाके हों, economic competition हो rather than military competition. But खैर जब आपको यह बात समझ आती है कि यार America का जो निज़ाम था top down Russia में नहीं होता, North Korea में नहीं होता, Iran में नहीं होता, China में नहीं होता. तमाम उन मुमालिक में नहीं होता जिनसे America को मसला है और इसी वजह से मसला था. बाकी तमाम मुमालिक जैसा कि हमारा मुल्क है, उसमें भी वही system है जो आपने आज तक देखा है कि यार कोई सीधा साधा काम करो, कोई genuine productive काम करो तो आपको उसकी कोई business case ही exist नहीं करता, उसका फ़ायदा ही नहीं है. काम कौन सा चलता है? You know, import करके माल market करके बेच दो. Stock market में पैसे बना लो. प्लौटों के ऊपर सट्टा खेल लो उसके ऊपर पैसे बना लो. एक particular elite capture और वह elite number घुमाने के ऊपर पैसे बना रही है. जो actual मेहनत का शय मज़दूर है वह पैसे नहीं बनाता. उसके ऊपर जो बंदा बैठा हुआ है जो उसकी delay कर रहा है वह पैसे बनाता है. Agriculture का पैसा आरती बनाता है. Business का पैसा banker बनाता है. Exporter का पैसा importer बनाता है. तो हमारे यहां भी finance capitalism ही चल रहा था. लेकिन जब ऊपर से finance capitalism का जो main गद्दी नशी हैं वही छोड़कर जा रहा है और वह कह रहा है कि अब जो future है वह industrial capitalism है और competition है, real market है, free market है तो फिर नीचे Pakistan में क्या होगा? यह important चीज़ है लोगों की देखने वाली. इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि कौन सा individual किसको जानता है? Trump किसको call करेगा? PTI के अंदर कौन सा बंदा है जिसकी Trump के कौन से बंदे से जान presentation दे कि Pakistan का future कैसे निकलेगा और IMF आपको आकर बताता है कि Pakistan का future कैसे निकलेगा? आपका businessman तो नहीं बताता, आपका exporter तो नहीं बताता. तो शायद अब वह निज़ाम चूके ख़त्म हो रहा है तो अब आपको concessions देने पड़ेंगे. या तो आप इसको fight करेंगे जो कि आपको इस वक़्त इस government में नज़र आ रहा है कि तमाम finance capitalist इकट्ठा हुआ है Pakistan के अंदर और वह कोशिश कर रहा है किसी तरह वह sustain कर जाए और वह थोड़ा अरसा और survive कर जाए और इसी वजह से उसको tension लगी हुई है Trump को देखकर. उनको Trump से मसला नहीं है. उनको मसला उस idea से है that Trump represents. इनको तो आदत हुई हुई थी dealओं की. इनको आदत हुई हुई थी कि बाहर से dollar आएगा. एक overall बड़े निज़ाम को हम sustain करेंगे और उसको sustain करने के खाते में जो हम rent लेते हैं वह हमारा rent चलता रहेगा, कोई tension ही नहीं है. अब चूंकि वह पेटेने जा रही है तो अगले चार साल बड़े मुश्किल होंगे. Exactly वह किस तरह से culminate करते हैं वह मुझे भी नहीं पता. वह हम भी देखेंगे, आप भी देखेंगे. लेकिन Trump के आने की वजह से सिर्फ़ और सिर्फ़ politically systems नहीं change होंगे. Political economy आपकी completely change होगी. Geopolitics पूरी region की change होगी. हमारी दोस्ती यारियां किसके साथ हैं, किसके साथ नहीं हैं, वह change होंगी. और personally हमारी जो ज़िंदगियां हैं अगले दस सालों के अंदर और हम क्या aspire करते हैं, क्या हम करना चाहते हैं, वह सब कुछ मेरे हिसाब से completely बदल जाएगा अगले दो से चार सालों के अंदर. But यहां पर मैं इसको ख़त्म करता हूं. बड़ी detail थी, free flow थी. मुझे नहीं पता आप लोगों को समझाइए, नहीं समझाइए. अगर समझ आई है तो बिया के नीचे comment section में बताएं. अगर नहीं समझ आई तो बड़ाई कर्म प्यार से एक मैं internet के ऊपर archival छोटा सा चुटकारा छोड़कर जाना चाहता हूं. लोगों के बड़े thoughts हैं, बड़ी feelings हैं. मुझे यह लगता है कि चूंकि Trump साहब जो है वह retreat करने लगे हैं in terms of American power and American economic might. तो Trump के आने से या तो foreign पहले या Trump के आने के छह महीने के अंदर मुझे लगता है कि US stock market crash करेगी और US economy एक recession की तरफ़ जाएगी. Generic बात मैंने कर दी है. Let's see कि time क्या होता है? मैं बाद में इसको वह करूंगा. यह दोनों चीज़ें याद रखिएगा. US stock market crash करेगी बहुत गंदे तरीके से और US economy एक recession की तरफ़ जाएगी. यह दो चीज़ें मुझे होती हुई नज़र आ रही हैं Trump के आने की फ़ौरन बात. यह शायद थोड़ा सा उससे पहले. Meanwhile, जो Pakistan के अंदर अगर मैं macro की बात करूं, long term direction की बात करूं, जो खान साहब और दूसरी side थी उसमें दूसरी side जो थी ना वह खान साहब को एक deal offer कर रही थी कि यार यह deal ले लें और आपकी ज़िंदगी आसान हो जाएगी. मुझे अब यह लगता है कि अब कुछ महीनों बाद But nonetheless मैं इसको थोड़ा सा आगे लेकर जा रहा हूं और मैं कह रहा हूं कि आप खान साहब एक deal offer करेंगे चंद महीनों में और इस बार जो है वह पहले यह था कि वह इन साहब की face saving के लिए deal होनी थी. अब वह इन साहब या इस crowd की exit strategy के लिए एक deal offer होगी. हम again मुझे गालियां ना दीजिएगा. मैं एक सिर्फ़ analysis पेश कर रहा हूं आप लोगों को. छह महीने बाद internet भी है, यह video भी है. हम देख लेंगे उसको. मसला unfortunately यह है मैं बड़ा खुल्ले में आप बोल तो हम भी उस time के ऊपर अपनी कहानियां और अपने analysis सामने ले आऐंगे. Nonetheless, यहां पर मैं इस video को ख़त्म करता हूं. यह थी जी, मेरा तज्जिया, मेरा opinion, मेरा analysis of Donald Trump and exactly America में क्या हो रहा है? मिलता है और साथ ही अगर आपने channel को subscribe नहीं किया तो sir अब हम daily की videos बना रहे हैं. हम geopolitics को भी देख रहे हैं. हम आपके career को सवारने की बहुत सारी tips भी दे रहे हैं. Overall as a professional, as a educated, intellectual, smart individual जिसने अपनी ज़िंदगी को बेहतर करना है, away from the noise of politics and ख़प, उसके बारे में हम बहुत सारा content लेकर आ रहे हैं तो बढ़ाई कर्म video को subscribe ज़रूर कर दीजिएगा और अगर आपको लगता है कि आपके किसी दोस्त को इस video को देखने से फ़ायदा मिलेगा तो उससे ज़रूर यह video share करें. But ख़ैर मेरा नाम सैयद मुज़मिल हसन जैदी है. आप देख रहे थे दिल की बात. देखने का बहुत बहुत शुक्रिया और मैं मिलता हूं आपसे अगली video में.